Shaiya daan kya hota hai: सनातन परंपरा में प्रयागराज के त्रिवेणी संगम लगने वाले माघ में कल्पवास का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. हिंदू मान्यता के अनुसार पुण्यदायिनी मां गंगा, पापनाशिनी मां यमुना और बुद्धिदायिनी मां सरस्वती के पावन संगम पर माघ के महीने में 33 कोटि देवी-देवता आकर निवास करते हैं. जिसके कारण इस क्षेत्र में पूरे एक महीने तक नियम-संयम के साथ स्नान, दान, पूजा, हवन, जप-तप, व्रत, यज्ञ, हवन, धार्मिक चिंतन और श्रवण करने का धार्मिक महत्व बहुत अधिक बढ़ जाता है.
प्रयाग में कितने प्रकार का किया जाता है दान?
हिंदू मान्यता के अनुसार किसी भी तीर्थ स्थान दान का बहुत ज्यादा महत्व होता है, लेकिन जब यही दान तीर्थों के राजा कहलाने वाले प्रयागराज में माघ मास के दौरान कल्पवास करते हुए किया जाता है तो उसका धार्मिक महत्व और भी ज्यादा बढ़ जाता है. जाने-माने भागवत किंकर पं. हृदेश शास्त्री के अनुसार तीर्थ में किया गया कल्पवास में किया गया दान कई हजार गुना ज्यादा फल देने वाला माना गया है. प्रयागराज में कल्पवास के दौरान सामान्य रूप से 10 तरह के दान - गाय, घी, तिल, सोना, भूमि, वस्त्र, अन्न, गुड़, चांदी और नमक का दान किया जाता है. इनके अलावा प्रयागराज में वेणी दान, गुप्त दान के साथ शय्या दान (सेझिया दान) का भी बहुत ज्यादा महत्व माना गया है.
कौन करता है शय्या दान?
हिंदू परंपरा में शय्या दान का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. यह दान किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद या फिर 12 वर्ष के कल्पवास पूर्ण होने के बाद किया जाता है. इन दोनों जगह पर किये जाने वाले शय्या दान के पीछे पुण्य की प्राप्ति और मोक्ष की कामना निहित है. मान्यता यह भी है कि इस शय्या दान को करने पर कल्पवास के दौरान जाने-अनजाने में जो भी भूल हुई होती है, उसका पश्चाताप भी हो जाता है. हिंदू धर्म में भी दान तमाम तरह के दुख और दोष को दूर करने का बड़ा माध्यम बताया गया है.
